Jungle Ka Talaab - Bachhon Ki Hindi Kahaniyan

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Jungle Mein Sabha - Bachhon Ki Hindi Kahaniyan
Jungle Mein Sabha - Bachhon Ki Hindi Kahaniyan


जंगल का तालाब - बच्चों की हिंदी कहानिया


  एक दिन एक जंगल में सभी जानवरों और पक्षियों ने सभा रखी थी। सभी छोटे बड़े जानवर और तरह-तरह के पक्षी उस मीटिंग में आए थे। गर्मी की ऋतु शुरू हो चुकी थी और जंगल के बीच में एक ही तालाब था। जानवरों को चिंता थी कि कहीं यह तालाब गर्मियों में सुख ना जाए क्योंकि अगर ऐसा होगा तो सब पानी कैसे पिएंगे! सभी जानवर चिंतित थे क्योंकि पिछले साल गर्मियों में पानी बहुत ही कम बचा था। सुखा पड़ने ही वाला था। सभी जानवर परेशान हो गए थे। लेकिन बारिश जल्दी आने की वजह से कोई समस्या नहीं हुई। पर यह जरूरी तो नहीं की हर साल बारिश जल्दी ही आए और इसी वजह से उन्हें कोई तरीका ढूंढना था जिससे जंगल का पानी बचा रहे।
  बहुत देर तक यह सभा चलती रही और बहुत से जानवर ने अपने अपने सुझाव दिए लेकिन कोई ऐसा आईडिया नहीं मिला जिससे की पानी को बचाया जा सके। आखिर में एक सयाने उल्लू ने एक रास्ता सुझाया कि क्यों ना हम पानी जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल ही ना करें। दिन में सिर्फ तीन से चार बार ही पानी पिए और वह भी सिर्फ चार घूंट पानी ही पिए जिससे ना ज्यादा पानी इस्तेमाल होगा और नाही पानी की कोई बर्बाद ही करेगा। कोई भी पानी में रोज-रोज नहीं नहीं नहाएगा। सभी जानवरों को और पक्षियों को यह सुझाव ठीक लगा और सब खुश थे की इस तरह से पानी जरूर बच जाएगा और गर्मियों के दिन आराम से निकल जाएंगे।
  लेकिन इन सब में एक चिड़िया को यह बात ठीक नहीं लगी। चिड़िया ने कहा की यह तो बिल्कुल ठीक बात नहीं है कि सब चार चार घूंट ही पानी पिए। जितना पानी यह हाथी चार घूंट में पिएगा उतना तो मैं महीने में भी नहीं पीऊंगी। जरा उसका कद देखो और जरा मेरा कद देखो। क्या दोनो में कोई समानता है। आप में से कुछ जानवर बहुत बड़े है और कुछ बहुत छोटे तो दोनो चार घूंट कैसे पी सकते है। यह तो बिल्कुल गलत है। मैं तो पेट भरकर पानी पीऊंगी क्योंकि मैं कद में बहुत छोटी हूं। बहुत से छोटे-छोटे जानवरों को और पक्षियों को चिड़िया की यह बात ठीक लगी और उन्होंने कहा की हम भी अपना पेट भर कर पानी पिएंगे क्योंकि हम बहुत छोटे हैं और आप जितना पानी तो बिल्कुल नहीं पीते। न हमारे नहाने से पानी इतना बर्बाद होगा जितना आप लोगो से। हम तो हाथी की तरह पानी सुंड में लेकर चारो तरह उड़ाते भी नही है। जब की उसका परिवार दिन भर पानी में पड़ा रहता है। 
  इस बात से हाथी और कुछ बड़े जानवर नाराज हो गए। उन्होंने कहा तो क्या हमारा पेट चार घूंट से भर जाएगा फिर भी हम सोच रहे थे वरना क्या हमें रोज नहाना पसंद नहीं है। अब हम भी पेट भर कर ही पानी पिएंगे और रोज नहाएंगे। बाकी के जानवर इन्हें समझा नहीं पाए कि हमें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि इस तरह से किसी को भी पानी नहीं मिलेगा, नदियों के सिकुड़ते ही तालाब का पानी कम होते जाएगा और पानी बर्बाद करने से पानी खत्म हो जाएगा। बहुत सारे शोर के बाद यह मीटिंग खत्म हो गई और कोई किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा। उल्टा सब ने अपनी मनमानी करने की ठान ली।
  कुछ ही दिनों में जंगल में गर्मियां बढ़ने लगी और नदियों का पानी कम होते होते बिल्कुल कम हो गया और तालाब में जितना पानी था इतने पानी से ही गर्मियों के दिन अब काटने थे। लेकिन चिड़िया तो इतराती हुई पेट भर के पानी पीती थी। उसने सोचा था की अगर पानी खत्म भी हो जाए तो क्या वह तो उड़ कर कही और चलीं जाएगी। हाथी भी यही सोचता था की अगर पानी खत्म हो गया तो वो भी अपने परिवार के साथ पास के जंगल चला जाएगा जहा दूसरे हाथी रहते है। वह भी खुब पानी पीता, अपने परिवार के साथ खूब नहाता, पानी उड़ेलता। बाकी जानवरों का भी यहीं हाल था। देखते देखते ही गर्मियां बहुत बढ़ गई। तेज धूप की वजह से भी तालाब सुख रहा था और पानी बर्बाद होने से भी। फिर धीरे - धीरे वह तालाब पूरा सुख गया और बारिश का कहीं कोई पता नहीं था। 
  सभी जानवर प्यास से बेहाल थे और जंगल छोड़कर आसपास के जंगलों में जाने लगे थे। चिड़िया अपने परिवार के साथ उड़ गईं और पास के एक जंगल चली गई। उस जंगल में भी पानी कम ही था और पहले से ही बहुत ज्यादा जानवर आसपास से आए हुए थे और उन सब ने तय किया था की चिड़िया के जंगल के किसी जानवर को यह रुकने नही देंगे क्योंकि उन्होंने अपना पानी खुद बर्बाद किया है और उनके मीटिंग की बात आसपास के सभी जंगलों में फैल चुकी थी। कई जगह से चिड़िया को भगाया गया और जैसे तैसे बिनती कर कर के चिड़िया ने गर्मियों के दिन गुजारे। दूसरी तरफ हाथी के साथ भी यहीं हुआ। किसी भी जगह हाथी का स्वागत नहीं हुआ। मुश्किल से उन्हें कहीं पर घूंट भर पानी मिलता था। सारी गर्मियां हाथी के परिवार ने पानी की खोज में ही निकाली। कही कही पर ही उन्हें बहुत कम पानी मिला वरना मिलो तक पानी की एक बूंद भी नही थी। 
  आखिर देर से ही सही पर बारिश आ गईं और सब की जान में जान आई। सब वापस अपने घर अपने जंगल लौट आए। सब बहुत खुश थे। जंगल में हरियाली लौट आई थी। नदिया फिर से बहने लगी थी। तालाब भर चुका था। जंगल में खुशियों भरा शोर मच रहा था। साथ ही सभी को अपनी गलती का अहसास था और बहुत पचता रहे थे। चिड़िया को, हाथी को और बाकी जानवरों को अपनी अपनी गलती समझ आ गई थी और फिर सब ने ठान लिया की आगे से कभी भी ऐसी गलती नही दोहराएंगे। पानी को हमेशा बचाएंगे और कभी इसे बर्बाद नही करेंगे। 

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